कोलंबिया के जंगलों से उठते काले धुएं ने एक बार फिर लैटिन अमेरिकी देशों की हवाई सुरक्षा की पोल खोल दी है। जब एक सैन्य विमान आग का गोला बनकर जमीन पर गिरता है, तो वह सिर्फ मशीन का नुकसान नहीं होता। वह उन 90 परिवारों की उम्मीदों का टूटना है जिन्होंने अपने बेटों को देश की सेवा के लिए भेजा था। कोलंबियाई एयरफोर्स का यह क्रैश कोई मामूली हादसा नहीं है। यह इशारा है उस सिस्टम की खामियों की ओर जिसे अक्सर 'तकनीकी खराबी' कहकर फाइलों में दबा दिया जाता है।
शुरुआती रिपोर्ट्स डराने वाली हैं। विमान क्रैश हुआ और देखते ही देखते मलबे में तब्दील हो गया। चश्मदीदों की मानें तो धमाका इतना तेज था कि दूर-दराज के इलाकों तक उसकी गूंज सुनाई दी। अभी तक 90 सैनिकों की मौत की आशंका जताई जा रही है, जो किसी भी शांति काल के दौरान एक बहुत बड़ी क्षति है। पर क्या यह सिर्फ किस्मत का खेल था? या फिर इसके पीछे पुराने होते विमान और रखरखाव में बरती गई लापरवाही जिम्मेदार है?
आसमान में क्यों फेल हो रहे हैं कोलंबियाई विमान
कोलंबिया का भूगोल बहुत कठिन है। वहां की पहाड़ियां और घने जंगल पायलटों के लिए हमेशा से चुनौती रहे हैं। लेकिन जब हम एयरफोर्स की बात करते हैं, तो हम दुनिया की बेहतरीन ट्रेनिंग और मशीनों की उम्मीद करते हैं। पिछले कुछ सालों में कोलंबियाई वायुसेना के रिकॉर्ड्स को देखें, तो सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
विमान का आग का गोला बनना बताता है कि इंजन में या तो ईंधन का रिसाव था या फिर कोई बड़ा मैकेनिकल फेलियर हुआ। सैन्य अभियानों में इस्तेमाल होने वाले इन विमानों पर अक्सर क्षमता से अधिक भार लाद दिया जाता है। जब विमान अपनी उम्र पूरी कर चुके होते हैं, तो वे दबाव झेलने में नाकाम रहते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि लैटिन अमेरिकी देशों में रक्षा बजट का एक बड़ा हिस्सा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है। इससे होता यह है कि विमानों के स्पेयर पार्ट्स समय पर नहीं बदले जाते। पुराने पैचवर्क के सहारे इन उड़ती हुई मशीनों को मौत के जाल में बदल दिया जाता है। इस हादसे में जान गंवाने वाले सैनिक शायद इसी व्यवस्था की बलि चढ़ गए।
90 परिवारों का दर्द और सरकार की खामोशी
हादसे के बाद अक्सर सरकारी बयान आते हैं। जांच के आदेश दिए जाते हैं। मुआवजे की घोषणा होती है। लेकिन क्या इससे वह बुनियादी समस्या हल होती है? 90 सैनिकों की मौत की आशंका ने पूरे देश को झकझोर दिया है। कोलंबियाई रक्षा मंत्रालय फिलहाल आंकड़ों को लेकर सतर्क है, लेकिन ग्राउंड जीरो से आने वाली तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं।
विमान का ढांचा इस कदर जल चुका है कि पहचान करना भी मुश्किल हो रहा है। रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे दल को खराब मौसम और दुर्गम इलाके की वजह से भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने विमान को हवा में ही डगमगाते देखा था। इसका मतलब है कि पायलट ने आखिरी दम तक इसे आबादी से दूर ले जाने की कोशिश की होगी।
रक्षा तंत्र में सुधार की सख्त जरूरत
यह घटना पहली बार नहीं हुई है। इससे पहले भी सैन्य हेलीकॉप्टर और छोटे मालवाहक विमान क्रैश होते रहे हैं। कोलंबिया को अपनी वायुसेना के बेड़े का ऑडिट करने की जरूरत है। अगर विमान उड़ने लायक नहीं हैं, तो उन्हें जबरदस्ती हवा में रखना सैनिकों की जान से खिलवाड़ है।
अक्सर ऐसे हादसों के बाद जांच कमेटियां बैठती हैं जिनकी रिपोर्ट कभी सार्वजनिक नहीं होती। पारदर्शिता की कमी ही वह मुख्य कारण है जिससे गलतियां बार-बार दोहराई जाती हैं। हमें यह समझना होगा कि एक सैनिक की जान की कीमत किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक विफलता से कहीं ऊपर है।
क्या खराब मौसम ही एकमात्र विलेन है
अक्सर अधिकारी मौसम को दोष देकर पल्ला झाड़ लेते हैं। यह सच है कि कोलंबिया में मौसम अचानक बदलता है। लेकिन आधुनिक विमानों में वेदर रडार और नेविगेशन सिस्टम होते हैं जो पायलट को खतरे का संकेत पहले ही दे देते हैं। अगर विमान आग का गोला बना, तो इसका सीधा संबंध ईंधन टैंक या इंजन से है, मौसम से नहीं।
जांच में इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि आखिरी बार इस विमान की सर्विसिंग कब हुई थी। क्या पायलटों ने उड़ान भरने से पहले किसी तकनीकी खराबी की शिकायत की थी? अक्सर दबाव में आकर पायलटों को ऐसी मशीनों के साथ उड़ान भरनी पड़ती है जिन्हें तकनीकी रूप से 'ग्राउंडेड' होना चाहिए था।
हवाई सुरक्षा के लिए अब क्या करना होगा
सिर्फ शोक मनाने से काम नहीं चलेगा। कोलंबिया को अपने पूरे विमान बेड़े को बदलना होगा। पुराने अमेरिकी और रूसी मॉडल अब अपनी एक्सपायरी डेट पार कर चुके हैं।
- बेड़े का तत्काल सेफ्टी ऑडिट शुरू किया जाए।
- ब्लैक बॉक्स की डेटा रिकॉर्डिंग को स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से साझा किया जाए।
- पायलटों के वर्किंग ऑवर और मानसिक तनाव की जांच हो।
- रक्षा सौदों में पारदर्शिता लाई जाए ताकि घटिया पार्ट्स की सप्लाई रुके।
हादसे सबक सिखाने के लिए होते हैं, फाइलों में बंद होने के लिए नहीं। अगर अब भी सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में हम और भी कई 'आग के गोले' आसमान से गिरते देखेंगे। यह कोलंबिया के लिए जागने का समय है। अपने सैनिकों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी अब सरकार के कंधों पर है।
अगर आप इस क्षेत्र की रक्षा राजनीति को करीब से देखना चाहते हैं, तो पिछले पांच साल के क्रैश डेटा पर नजर डालें। आपको पैटर्न समझ आ जाएगा। रक्षा विशेषज्ञों की राय और बजट आवंटन की रिपोर्ट पढ़ना शुरू करें। इससे पता चलेगा कि असल में पैसा जा कहां रहा है और हमारे सैनिक किस कीमत पर देश की रक्षा कर रहे हैं।